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एक लाख से ज्‍यादा भारती रेल कर्मचारियों को जल्‍द मिल सकता है यह बकाया भत्‍ता…

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नई दिल्‍ली। कोरोना काल में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान भारतीय रेलवे की पैंसेजर सेवाओं के बंद रहने का असर केवल यात्रियों पर नहीं पड़ा, बल्कि रेलवे कर्मचारियों भी इससे वित्‍तीय रूप से काफी प्रभावित हुए। खास तौर पर भारतीय रेलवे का रनिंग स्‍टाफ. पैसेंजर ट्रेनों के न चलने से रनिंग स्‍टाफ को मिलने वाला ALK यानि किलोमीटर के बदले भत्ता रूक गया, जिसका भुगतान किए जाने को लेकर अब रेलवे बोर्ड पर दबाव बन रहा है। लिहाजा, रेलवे बोर्ड ने इस मसले पर गंभीरता से संज्ञान लिया है और सभी जोन के महाप्रबंधकों से ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ पर रेलवे रनिंग स्‍टाफ को द‍िए गए ALK के बारे में विस्‍तृत जानकारी साझा करने को कहा है। रेलवे बोर्ड के इस कदम से रनिंग स्‍टाफ के रूके हुए भत्‍ते के जल्‍द जारी होने की उम्‍मीद बढ़ गई हैं। रेलवे कर्मचारी की बेसिक के 30 प्रतिशत के रूप में ALK का भुगतान किया जाता है। बता दें कि भारतीय रेलवे के करीब 1 लाख 22 हजार कर्मचारी रनिंग स्‍टाफ के दायरे में आते हैं। इनमें करीब 86 हजार लोको पायलट एवं अस‍िस्‍टेंट लोको पायलट, जबकि 36 हजार गार्डस शामिल हैं।


रेलवे बोर्ड की तरफ से जारी एक आदेश में सभी 17 जोन के महाप्रबंधकों को कहा गया है कि Covid 19 के दौरान पैंसेंजर ट्रेनों के कैंसिल रहने के कारण रनिंग ड्यूटी नहीं कर पाए रनिंग स्‍टाफ को किलोमीटर के बदले भत्ते (ALK) के भुगतान को लेकर कई जोनल रेलवे और फेडरेशन की तरफ से जानकारियां मांगी गई हैं। बोर्ड की तरफ से इस मामले की जांच की गई है। इसके साथ ही सभी महाप्रबंधकों से ALK के किए गए भुगतान के बारे में भी जानकारी मांगी गई हैं, जिसमें कहा गया है कि अगर इस संबंध में भुगतान किया गया है तो मार्च 2020 से नवंबर 2020 तक का प्रत्‍येक माह का ब्रेकअप रेलवे बोर्ड को 28 दिसंबर तक उपलब्‍ध कराया जाए, ताकि मामले में आगे की कार्रवाई की जा सके. साथ ही इस मामले को टॉप प्रायोरिटी पर लिए जाने के आदेश भी दिए गए हैं। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन और नॉर्दन रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि रेल यूनियनों की तरफ से रेलवे बोर्ड के समक्ष यह मामला गंभीरता से उठाया गया है। उनका कहना है कि कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान ट्रेनें नहीं चलाई गईं। इसके चलते रनिंग स्‍टाफ काम नहीं कर पाया तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। हालांकि बाद में श्रमिक ट्रेनें, स्‍पेशल ट्रेनें भी चलाई गईं, जिनमें रनिंग स्‍टाफ ने बखूबी काम किया। लॉकडाउन के दौरान मालगाडि़यां ज्‍यादा चलाई गईं, जिनमें स्‍टाफ ने काम किया। लिहाजा, बोर्ड के समक्ष यह बात उठाई गई है कि रनिंग स्‍टाफ के एएलके का जल्‍द से जल्‍द भुगतान किया जाए।

रेलवे बोर्ड ने इस मसले पर गंभीरता से संज्ञान लिया है और सभी जोन के महाप्रबंधकों से ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ पर रेलवे रनिंग स्‍टाफ को द‍िए गए ALK के बारे में विस्‍तृत जानकारी साझा करने को कहा है। रेलवे बोर्ड के इस कदम से रनिंग स्‍टाफ के रूके हुए भत्‍ते के जल्‍द जारी होने की उम्‍मीद बढ़ गई हैं। रेलवे कर्मचारी की बेसिक के 30 प्रतिशत के रूप में ALKका भुगतान किया जाता है।

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