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लॉकडाउन के बीच पीएम मोदी ने फिर की देशवासियों से ‘मन की बात’, पढ़ें

नई दिल्ली : कोरोना वायरस को रोकने लॉकडाउन की अवधि को तीन मई तक बढ़ा दिया गया है। इस बीच पीएम मोदी ने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देशावसियों को आज (26 अप्रैल) संबोधित किया। मन की बात का यह 64वां एपिसोड है। पीएम मोदी का यह रेडियो कार्यक्रम हर महीने के अंतिम रविवार को होता है। 25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन है। इसके बाद पीएम मोदी ने 29 मार्च के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कोरोना वायरस महामारी को लेकर बात की थी। उन्होंने लॉकडाउन को लेकर क्षमा मांगते हुए कहा था कि मैं आपकी दिक्कतें समझता हूं, आपकी परेशानी भी समझता हूं लेकिन भारत जैसे 130 करोड़ की आबादी वाले देश को, कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए, ये कदम उठाए बिना कोई रास्ता नहीं था।

मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार। 
आप सब lockdown में इस ‘मन की बात’ को सुन रहे हैं। इस ‘मन की बात’ के लिये आने वाले सुझाव, phone call की संख्या, सामान्य रूप से कई गुणा ज्यादा है। कई सारे विषयों को अपने अन्दर समेट, आपकी यह मन की बातें, मेरे तक, पहुँची हैं। मैंने कोशिश की है, कि, इनको ज्यादा-से-ज्यादा पढ़ पाऊँ, सुन पाऊँ। आपकी बातों से कई ऐसे पहलू जानने को मिले हैं, जिनपर, इस आपा-धापी में ध्यान ही नहीं जाता है। मेरा मन करता है, कि, युद्ध के बीच हो रही इस ‘मन की बात’ में, उन्हीं कुछ पहलुओं को, आप सभी देशवासियों के साथ बाटूँ।

साथियों, 
भारत की CORONA के खिलाफ़ लड़ाई सही मायने में  people driven है। भारत में CORONA के खिलाफ़ लड़ाई जनता लड़ रही है, आप लड़ रहे हैं, जनता के साथ मिलकर शासन, प्रशासन लड़ रहा है। भारत जैसा विशाल देश, जो विकास के लिए प्रयत्नशील है, ग़रीबी से निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। उसके पास, CORONA से लड़ने और जीतने का यही एक तरीका है। और, हम भाग्यशाली हैं कि, आज, पूरा देश, देश का हर नागरिक, जन-जन, इस लड़ाई का सिपाही है, लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। आप कहीं भी नज़र डालिये, आपको एहसास हो जायेगा कि भारत की लड़ाई people driven है। जब पूरा विश्व इस महामारी के संकट से जूझ रहा है। भविष्य में जब इसकी चर्चा       होगी, उसके तौर-तरीकों की चर्चा होगी, मुझे विश्वास है कि भारत की यह people driven लड़ाई, इसकी ज़रुर चर्चा होगी। पूरे देश में, गली-मोहल्लों में, जगह-जगह पर, आज लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए आगे आये हैं। ग़रीबों के लिए खाने से लेकर, राशन की व्यवस्था हो, lockdown का पालन हो, अस्पतालों की व्यवस्था हो, medical equipment का देश में ही निर्माण हो – आज पूरा देश, एक लक्ष्य, एक दिशा, साथ-साथ चल रहा है। ताली, थाली, दीया, मोमबत्ती, इन सारी चीज़ों ने जो भावनाओं को जन्म दिया। जिस ज़ज्बे से देशवासियों ने, कुछ-न-कुछ करने की ठान ली – हर किसी को इन बातों ने प्रेरित किया है। शहर हो या गाँव, ऐसा लग रहा है, जैसे देश में एक बहुत बड़ा महायज्ञ चल रहा है, जिसमें, हर कोई अपना योगदान देने के लिये आतुर है। हमारे किसान भाई-बहनों को ही देखिये – एक तरफ, वो, इस महामारी के बीच अपने खेतों में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और इस बात की भी चिंता कर रहे हैं कि देश में कोई भी भूखा ना सोये। हर कोई, अपने सामर्थ्य के हिसाब से, इस लड़ाई को लड़ रहा है। कोई किराया माफ़ कर रहा है, तो कोई अपनी पूरी पेंशन या पुरस्कार में मिली राशि को, PM CARES  में जमा करा रहा है। कोई खेत की सारी सब्जियाँ दान दे रहा है, तो कोई, हर रोज़ सैकड़ों ग़रीबों को मुफ़्त भोजन करा रहा है। कोई mask बना रहा है, कहीं हमारे मजदूर भाई-बहन quarantine में रहते हुए, जिस school में रह रहे हैं, उसकी रंगाई-पुताई कर रहे हैं।

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